New Zealand: न्यूजीलैंड के टौरंगा शहर में रविवार को सिख समुदाय के वार्षिक नगर कीर्तन के रास्ते में स्थानीय राइट‑विंग धार्मिक समूह के लोगों ने फिर से दखल दिया। यह तीन हफ्तों में दूसरी बार है जब इस तरह का विरोध देखा गया है। नगर कीर्तन सुबह 11 बजे गुरुद्वारा सिख संगत मंदिर से शुरू हुआ और कैमरन रोड से टौरंगा बॉयज कॉलेज की ओर बढ़ा। पुलिस ने पहले से सुरक्षा बढ़ा रखी थी क्योंकि पिछले कुछ समय में इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं।
बता दें कि प्रदर्शन करने वाले समूह जो पेंटेकोस्टल नेता ब्रायन तमाकी के डेस्टिनी चर्च से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस समूह के लोगों ने कीर्तन के सामने मैओरी हाका नामक पारंपरिक नृत्य प्रदर्शन किया और यह न्यूजीलैंड है, भारत नहीं, जैसे नारों वाले बैनर दिखाए। हालांकि कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई और पुलिस तथा कीर्तन के स्वयंसेवकों की संयुक्त मदद से यह कार्यक्रम शांति से पूरा हो गया।
तमाकी ने सोशल मीडिया पर भी किया पोस्ट
इस विरोध प्रदर्शन को लेकर तमाकी ने सोशल मीडिया पर खुद एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने इस प्रदर्शन को शांति पूर्ण बताया। साथ ही वीडियो के कैप्सन में लिखा कि किसकी सड़के? कीवी की सड़के! हालांकि दूसरी ओर शिरोमणि गुरुद्वारा परबंधक समिति (एसजीपीसी) ने इस विरोध की कड़ी निंदा की है।
इस विरोध प्रदर्शन को लेकर तमाकी ने सोशल मीडिया पर खुद एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने इस प्रदर्शन को शांति पूर्ण बताया। साथ ही वीडियो के कैप्सन में लिखा कि किसकी सड़के? कीवी की सड़के! हालांकि दूसरी ओर शिरोमणि गुरुद्वारा परबंधक समिति (एसजीपीसी) ने इस विरोध की कड़ी निंदा की है।
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिन्दर सिंह धामी ने कहा कि नगर कीर्तन सिख धर्म का पवित्र और शांतिपूर्ण प्रतीक है, और इसे रोकने की कोशिश धार्मिक आजादी तथा सामाजिक सद्भाव को चुनौती देना है। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय हमेशा स्थानीय कानून और संस्कृति का सम्मान करता रहा है, लेकिन ऐसे व्यवस्थित विरोध ने समुदाय को गहरा दुख पहुंचाया है।
एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिन्दर सिंह धामी ने इस विरोध प्रदर्शन को लेकर न्यूजीलैंड तथा भारत सरकार से सख्त कदम उठाने की अपील की है। गौतरलब है कि यह दूसरी बार है जब नगर कीर्तन का विरोध हुआ है। इससे पहले लगभग तीन हफ्ते पहले भी ऑकलैंड में एक नगर कीर्तन को इसी समूह के विरोध का सामना करना पड़ा था, जिससे स्थानीय सिख समुदाय में तनाव बढ़ गया था और पंजाब के मुख्यमंत्री व एसजीपीसी समेत कई धार्मिक व राजनीतिक नेताओं ने उस घटना की भी निंदा की थी।

